| जीवन |
| शब्दांतून उतरते ती असते अनुभूती, |
| जे बोलू शकत नाही ती आहे मर्यादा |
| जीवन आपले असते शांत आणि निःशब्द, |
| त्यात आपल्यालाच भरायच असतात शब्द. |
| दारावरती थाप देणे असते केवळ साद, |
| नाही कुणी दार तोडून करत ते बरबाद. |
| परिवारातील प्रत्येक माणूस |
| असतो आपल्या जवळी, |
| जसे जीवनरूपी झाडावर |
| पाने… हिरवी, सुकी, कोवळी |
| आपल्याला सगळ्यांनाच सांभाळायचय कारण…. |
| जीवन कधीच थांबत नाही |
| कुण्या एका शिवाय… |
| परंतू, जीवन जगूसुद्धा शकत नाही |
| आपल्या माणसांच्या अभावात. |
| पैशांची गुल्लक समजते |
| त्यातली सर्व रक्कम आहे आपले, |
| परंतू क्षणार्धात फोडल्यावर |
| संपूर्ण स्वप्न असते भंगले. |
| जीवनाचेही तसेच असते |
| सर्वस्वी नात्यांना जपणं |
| शेवटी काय ? प्रभावाखाली यांच्या….. |
| मेहनत, प्रारब्ध आणि स्वप्न. |
| “कविमोल” अमोल बारई |
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