| नाना रंग, नाना तऱ्हा |
| डोळे काळे आणि पांढरे |
| जन्म घालती रंगीत स्वप्न ! |
| काय जादू केली देवा, |
| मला नेहमीच पडतो प्रश्न. |
| अपशकून म्हणुनी सारती |
| दूर त्या काळ्या रंगाला, |
| अन् त्याच शुभ कार्याला |
| काळाच रंग लावती केसांना ! |
| पांढरा शुभ्र कापूस, |
| त्याचे कापड रंगबिरंगी. |
| इंद्रधनू हाती घेवूनी |
| धनुष्य सप्तरंगी. |
| निळेशार हे आकाश, |
| हिरवेगार जंगल विस्तीर्ण , |
| काळे कुट्ट ढग जमले, |
| कधी लाल भडक सूर्य. |
| निळा शार अथांग सागर, |
| अमावशेची काळी कुट्ट रात्र, |
| पांढरा शुभ्र झेंडा घेवूनी, |
| शत्रू बनतात तहात मित्र. |
| नाना रंग त्यांच्या नाना तऱ्हा, |
| खूपच सुंदर आहे रंगांची किमया. |
| रंगातच आहे खरी रंगत न्यारी, |
| न्हाऊन निघते सारी दुनिया. |
| “कविमोल” अमोल बारई |
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