| महती सांगतो पावसाची |
| निसर्गाच्या सोबतीला |
| असतो मी जेंव्हा जेंव्हा, |
| काहीतरी शिकवण मळा |
| मिळते तेंव्हा तेंव्हा. |
| झाडे लावा, झाडे जगवा |
| नि:स्तब्ध सांगतात वने, |
| नदी, नाले झुळझुळ सांगती |
| घाला नवी नवी धरणे. |
| झाडांनी या पाऊस येती |
| अपूल्या धरणीवरती, |
| कोण गड्या सांगील तुम्हाला |
| पावसाची ही किर्ती. |
| नदी, नाले हे वाहत जाती |
| पाणी वाया जाई, |
| अडवून ठेवा पाणी सगळे |
| दुष्काळ हा पळून जाई. |
| पावसाची कृपा जोवरी |
| पीकती हिरवी मळे, |
| पाण्यामुळे शक्य झाले |
| रोख रक्कम मीळे. |
| गरीबाचा तो श्रीमंत झाला |
| याच पावसावरती, |
| म्हणून मी सांगतो तुम्हाला |
| पावसाची ही महती. |
| “कविमोल” अमोल बारई |
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